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प्रकृति प्रदत्त सभी साधनों से इतर विद्या ही एक ऐसा धनबल है, जिससे सम्यक रूप से व्यक्ति का चतुर्दिक विकास होता है:- विद्यापति झा (सर)

पवन कुमार मिश्रा की रिपोर्ट 


ढाका/पूर्वी चंपारण जिले के पूर्वी मुहाने पर पदुमकेर व पचपकड़ी जैसे सुदूर ग्रामीण परिक्षेत्र व शांतिपूर्ण वातावरण में संचालित विद्यापति पब्लिक स्कूल पिछले बीस वर्षों से जरूरतमंद समाज के लिए शिक्षा का अलख जगा रहा है। अब तक इस संस्थान से हजारों बच्चे कुशल शिक्षा पाकर सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों सहित राष्ट्रीय सैनिक सेवा में भी अहम योगदान देकर अपना व अपने समाज का नाम रोशन किया है।


दरअसल में मैं सैनिक स्कूल, रीवा, मध्य प्रदेश से उत्तीर्ण होकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से कमिशन ऑफिसर के लिए प्रशिक्षण ले रहा था, परंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। परिस्थिति जन्य कारणों वश मेरे अंदर यह भाव जगा, कि मुझे एक नहीं राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए अनेकों कैडेट तैयार करना है। इसी भावना के वशीभूत हो मैंने इस क्षेत्र का चयन किया। इस क्षेत्र को विशेष रूप से आधुनिक शिक्षा की खास जरूरत थी। आज यह विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, दिल्ली से मान्यता प्राप्त ही नहीं वरन शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर तथा पूर्वी चंपारण सहित नेपाल के सीमा परिक्षेत्र के लोगों के लिए गौरव का विषय है।


मैं तो यही कहना चाहूंगा कि प्रकृति प्रदत साधनों से इतर विद्या ही ऐसा धनबल है, जिससे सम्यक रूप से व्यक्ति का चतुर्दिक विकास होता है। मेरे हिसाब से मानव-समाज की अनन्य आवश्यकताओं में शिक्षा व स्वास्थ अति महत्वपूर्ण है। स्वस्थ मन से ग्रहण की गई उत्तम शिक्षा व्यक्ति ही नहीं वरन समाज को भी परिष्कृत करती है। शिक्षा समाज का मूलाधार होता है। शिक्षा के साथ ही छात्रों में विनयशीलता भी अत्यावश्यक है। यह शिक्षार्थियों के लिए उतना ही आवश्यक है, जितना शरीर के लिए प्राणवायु। विद्या से विनयशीलता व विनयशीलता से व्यक्ति में पात्रता का समावेश होता है। वेदों में भी कहा गया है, कि "विद्या ददाति विनयम्, विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मस्ततः सुखं।। 


नोबेल पुरस्कार विजेता महान अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन बराबर कहा करते हैं। कि समाज के विकास के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो निचले स्तर ग्रास रूट पर जा कर समाज का विकास करो। मैं उसी भावना से प्रेरित हूँ। निरंतर शैक्षणिक स्तर पर समाज की सेवा करते आ रहा हूँ। और आगे भी हमारा यह सद प्रयास जारी रहेगा। 


वही इस विद्यालय के प्रबंधक प्रभास रंजन, उर्फ चंदन का कहना है। कि सीबीएसई के मानकों के अनुरूप यह विद्यालय क्षेत्र के जरूरत मंद बच्चों को आधारभूत व आधुनिक शिक्षा उपलब्ध करा रही है। जरूरत मंद बच्चे इस संस्थान में दाखिला लेकर अपना भविष्य निर्माण करें। यहां सभी बच्चों को नैतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक शिक्षा के साथ ही उत्तम संस्कार देकर, उन्हें योग्य नागरिक बनाने का प्रयत्न किया जाता है।

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